ग्रहों के अनुसार अब राशियों को जाना जा सकता है...
1. मेष, सिंह, वृश्चिक राशि वाले उग्र प्रकृति अर्थात गर्म स्वभाव के होते हैं तो उनमें पित्त प्रधान होता है।
2. वृषभ, कर्क, तुला, धनु, मीन राशि वालों का स्वभाव सुस्त होता है तो उनमें कफ प्रधान होता है।
3. मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि की प्रकृति हवादार होती है, तो उनमें वात तत्व प्रधान होता है।
* जब पित्त, वात और कफ का संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में विकार उत्पन्न होते हैं। व्यक्ति को अपनी प्रकृति समझ कर ही भोजन का चयन करना चाहिए। कुंडली की जांच करके खुद की प्रकृति अनुसार भोजन का चयन करेंगे तो बीमारियों से बचे रहेंगे।
उचित मेल को जानिए अगले पन्ने पर...
उचित मेल को जानिए :
* मौसमी फल खाना चाहिए।
* रसदार फलों के अलावा अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिए।
* आम और गाय का दूध मिलाकर पी सकते हैं।
* बथुआ और दही का रायता खा सकते हैं।
* दूध के सात खजूर खा सकते हैं।
* दही के सात आंवला चूर्ण ले सकते है।
* चावल के साथ नारियल की गिरी खा सकते हैं।
* दाल के साथ दही खा सकते हैं।
* अमरूद के साथ सौंफ खा सकते हैं।
* रोटी के साथ हरे पत्ते वाली सब्जी खा सकते हैं।
* अंकुरित दालों के साथ कच्चा नारियल खा सकते हैं।
* गाजर के सात मेथी का साग ले सकते हैं।
* श्वेतसार के साथ साग-सब्जी खाना उचित है।
* मेवे के साथ खट्टे फल ले सकते हैं।
* दाल और सब्जी साथ में खा सकते हैं।
* सब्जी व चावल की खिचड़ी ले सकते हैं।
अंतिम पन्ने पर, कुछ खास नियम जानिए...
* स्नान से पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें।
* भोजन के बाद कुछ देर बाईं करवट लेना चाहिए।
* रात को जल्दी सोना और सुबह को जल्दी उठना चाहिए।
* सूर्योदय के पूर्व गाय का ताजा दूध पीना चाहिए।
* व्यायाम के बाद दूध अवश्य पीएं।
* मल, मूत्र, छींक का वेग नहीं रोकना चाहिए।
* नेत्रों में सूरमा या काजल अवश्य लगाएं।
* स्नान रोजाना अवश्य करें।
* सूर्य की ओर मुंह करके पेशाब न करें।
* बरगद, पीपल, देव मंदिर, नदी, श्मशान में पेशाब न करें।
* गंदे कपड़े न पहनें, इससे हानि होती है।
* भोजन के समय क्रोध न करें। मौन रहें।
* भोजन ठूंस-ठूंसकर अधिक मात्रा में न करें।
* थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करें।
Posted by Gorang Kumar
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Thank you!
1. मेष, सिंह, वृश्चिक राशि वाले उग्र प्रकृति अर्थात गर्म स्वभाव के होते हैं तो उनमें पित्त प्रधान होता है।
2. वृषभ, कर्क, तुला, धनु, मीन राशि वालों का स्वभाव सुस्त होता है तो उनमें कफ प्रधान होता है।
3. मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि की प्रकृति हवादार होती है, तो उनमें वात तत्व प्रधान होता है।
* जब पित्त, वात और कफ का संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में विकार उत्पन्न होते हैं। व्यक्ति को अपनी प्रकृति समझ कर ही भोजन का चयन करना चाहिए। कुंडली की जांच करके खुद की प्रकृति अनुसार भोजन का चयन करेंगे तो बीमारियों से बचे रहेंगे।
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उचित मेल को जानिए :
* मौसमी फल खाना चाहिए।
* रसदार फलों के अलावा अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिए।
* आम और गाय का दूध मिलाकर पी सकते हैं।
* बथुआ और दही का रायता खा सकते हैं।
* दूध के सात खजूर खा सकते हैं।
* दही के सात आंवला चूर्ण ले सकते है।
* चावल के साथ नारियल की गिरी खा सकते हैं।
* दाल के साथ दही खा सकते हैं।
* अमरूद के साथ सौंफ खा सकते हैं।
* रोटी के साथ हरे पत्ते वाली सब्जी खा सकते हैं।
* अंकुरित दालों के साथ कच्चा नारियल खा सकते हैं।
* गाजर के सात मेथी का साग ले सकते हैं।
* श्वेतसार के साथ साग-सब्जी खाना उचित है।
* मेवे के साथ खट्टे फल ले सकते हैं।
* दाल और सब्जी साथ में खा सकते हैं।
* सब्जी व चावल की खिचड़ी ले सकते हैं।
अंतिम पन्ने पर, कुछ खास नियम जानिए...
* स्नान से पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें।
* भोजन के बाद कुछ देर बाईं करवट लेना चाहिए।
* रात को जल्दी सोना और सुबह को जल्दी उठना चाहिए।
* सूर्योदय के पूर्व गाय का ताजा दूध पीना चाहिए।
* व्यायाम के बाद दूध अवश्य पीएं।
* मल, मूत्र, छींक का वेग नहीं रोकना चाहिए।
* नेत्रों में सूरमा या काजल अवश्य लगाएं।
* स्नान रोजाना अवश्य करें।
* सूर्य की ओर मुंह करके पेशाब न करें।
* बरगद, पीपल, देव मंदिर, नदी, श्मशान में पेशाब न करें।
* गंदे कपड़े न पहनें, इससे हानि होती है।
* भोजन के समय क्रोध न करें। मौन रहें।
* भोजन ठूंस-ठूंसकर अधिक मात्रा में न करें।
* थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करें।
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