Healthy Life Style

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Wednesday, 8 April 2020

Electric current किसी भी कंपटीशन परीक्षा के लिए

विद्युत धारा


किसी चालक में समय के सापेक्ष विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं
धनात्मक आवेश के प्रवाह की दिशा में विद्युत धारा की दिशा मानी जाती है समानता विद्युत धारा एकांक समय (एक सेकंड) में प्रवाहित होने वाले आवेश के परिणाम को व्यक्त करती है विद्युत धारा का मात्रक एंपियर है जिसे अमीटर द्वारा मापा जाता है  
                     Q (आवेश)
      (धारा ) I  =----------------
                      T (समय)
कॉस चालक इलेक्ट्रॉन के द्वारा विद्युत धारा का वाहन करते हैं जबकि तरफ चालक आई नो के साथ इलेक्ट्रॉन द्वारा विद्युत धारा का वाहन करते हैं

                 आवेश के प्रकार
जब दो वस्तुओं के मध्य परस्पर दर्शन होता है तो उन दोनों वस्तुओं पर सामान परिणाम में आवेश उत्पन्न होता है परंतु उनकी प्रकृति एक दूसरे से विपरीत होती है उनमें एक वस्तु का आवेश ऋण आत्मक जबकि दूसरी वस्तु का आवेश धनात्मक होता है समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षण करते हैं जबकि विपरीत आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं

1 ऋण आत्मक(-)
2 धनात्मक(+)

                 कूलाम का नियम

कूलाम के नियम के अनुसार दो आवेशो(-q, +q) के मध्य लगने वाला आकर्षण बल(F) अथवा प्रतिकर्षण बल (F)उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है

               q₁______________q₂
                            r²

                    q₁q₂
            F=K-------------  
                      r²

 K एक नियतांक है इसका मात्रक न्यूटन / मीटर² है तथा मान 9 x 10⁹ N/m²/C² के बराबर है


                    चालक(conductor)
ऐसे पदार्थ जिनसे विद्युत आवेश का प्रवाह सरलता से होता है चालक कहलाते हैं ऐसे पदार्थों में प्रोटॉन की तुलना में इलेक्ट्रॉन की अधिकता होती है सभी धातुएं लवण आदि जल के जलीय विलियन के चालक है चांदी सर्वोत्तम चालक होता है
उदाहरण ----धातु (लोहा, चांदी ,तांबा ,इस्पात) अशुद्ध जल ,पृथ्वी ,ग्रेफाइट इत्यादि

Note भू संपर्क -------जब किसी आवेशित वस्तु पृथ्वी के संपर्क में लाया जाता है तो उसका अतिरिक्त आवेश जोड़ने वाले चालक में से होते हुए क्षणिक विद्युत धारा उत्पन्न करके भूमि में चला जाता है इस प्रक्रिया को ही भू संपर्क कहते हैं
  

                   चालक के प्रकार 

     अचालक                            अर्धचालक
रबड़ ,लकड़ी ,शुद्ध जल ,   सिलिकॉन, जर्मीनियम
चीनी मिट्टी ,कागज ,मोम,         कार्बन, सेलेनियम
 रेशम ,प्लास्टिक, रोई ,चमड़ा              आदि
आदि           

विद्युत क्षेत्र ----किसी आवेशित वस्तु के चारों ओर का वह क्षेत्र जहां वह किसी अन्य वस्तु से आकर्षण या प्रतिकर्षण का अनुभव करती है उस वस्तु का क्षेत्र ,विद्युत क्षेत्र कहलाता है

• विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर इकाई धन आवेश पर कार्य करने वाला आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल ब्रज क्षेत्र की तीव्रता कहलाती है

• यह एक सदिश राशि है इसका मात्रक volt/meter or N/C होता है
                                             F बल
                                      E =------------
                                            q₀ एका आवेश

विभवांतर ---------------विद्युत क्षेत्र में एक कूलाम धनात्मक विद्युत आवेश को एक बिंदु से किसी अन्य बिंदु तक ले जाने में किए गए धनात्मक कार्य को ही विभांतर कहते हैं 
अतात दो बिंदुओं के मध्य का विभांतर कहते हैं एक अदिश राशि होती है इसका मात्रक बोल्ट Jule/Coulomb है दो बिंदुओं के मध्य अंतर मापन करने के लिए बोल्ट मीटर का उपयोग किया जाता है

अमीटर

• विद्युत परिपथ में धारा की प्रबलता की माप करना है
• विद्युत परिपथ में श्रेणी क्रम का आयोजन करता है 
•इसकी माफ एंपियर में प्रदर्शित की जाती है

बोल्ट Meter 

विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के मध्य विभांतर माफ करता है 
•विद्युत परिपथ में समांतर क्रम में संयुक्त करता है •इसकी माप वोल्ट( V) में की जाती है की जाती है
🔌
 यदि परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा एक निश्चित समय अवधि के पश्चात परिवर्तित होती रहे अर्थात एक  दिशा में 0 से अधिकतम तथा दूसरी दिशा में अधिकतम से 0 के चक्कर में कार्य करें तो यह धारा प्रत्यावर्ती धारा(AC) कहलाती है

महत्वपूर्ण निर्देश

•यह धारा समय के साथ सात आवृत्ति रूप में परिवर्तन होती है घर में प्रयुक्त होने वाली प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 Hz तक होती है

•ट्रांसफार्मर के द्वारा दूरस्थ स्थानों पर प्रत्यावर्ती धारा का संचरण सरल एवं सस्ता है

•ट्रांसफार्मर द्वारा इसकी बोल्ट का बढ़ई या घटाई जा सकती है

•इसके संचरण में ऊर्जा की हानि कम होती है

•इसे चोक कुंडली द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है
•जिसमें उर्जा की हानि कम होती है

•इसके जनित्र तथा मोटर अधिक शक्तिशाली एवं सुविधाजनक होते हैं

•यह धारा मनुष्य को आकर्षित कर दी है

         दिष्ट धारा
ऐसी विद्युत धारा जिसका परिणाम एवं दिशा समय के साथ साथ परिवर्तित नहीं होती है दिष्ट धारा कहलाती है उदाहरण -बैटरी ,सेल डायनेमो ,इत्यादि

महत्वपूर्ण निर्देश
यह धारा समय के साथ-साथ आवर्ती रूप में परिवर्तित नहीं होती है इस धारा की आवृत्ति 0 होती है

•दूरस्थ स्थानों पर दिष्ट धारा का संचरण जटिल एवं महंगा है

•ट्रांसफार्मर पर इसका कोई नियंत्रण नहीं है

•इसके संचरण में ऊर्जा की हानि अधिक होती है

• इसको ओमियो प्रतिरोध के द्वारा नियंत्रित किया जाता है जिसमें ऊर्जा की हानि अधिक होती है

• इसके जनित्र तथा मोटर प्रत्यावर्ती धारा जनित्र एवं मोटर की तुलना में कम शक्तिशाली तथा कम सुविधाजनक होते हैं

•यह धारा मनुष्य को प्रतिकर्षण करती है

विद्युत वाहक बल --
किसी विद्युत ऊर्जा उत्पादक यंत्र द्वारा उत्पन्न किया गया ऐसा वर्ड जिसके कारण चालक या परिपथ में इलेक्ट्रॉन का प्रवाह होता है बीरबल कहलाता है इसका मात्रक वर्ल्ड अथवा Jule/कुलम है यदि किसी परिपथ में एक कूलाम आवेश प्रवाहित करने पर सेल द्वारा एक जूल ऊर्जा दी जाए तो सेल के विद्युत वाहक बल का मान 1 वोल्ट होता है

कुछ सेल                              विद्युत वाहक बल
वॉल्टियर और डेनियल सेल   -          1.08 volt
शुष्क और ल क्लांस सेल       -          1.50volt 
सीसा संचायक सेल               -         2.00volt
6 सेल वाली कार बैटरी         -           1.05volt

विद्युत विभव ---
विद्युत क्षेत्र में एकांक धन आवेश को आनंद से किसी निश्चित बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है यदि एक परीक्षण आवेश Q को infinite से किसी बिंदु तक लाने में प्रतिकर्षण बल F के विरुद्ध कार्य करना पड़े तब

                         किया गया कार्य (W)
       विद्युत विभव--------------------------
                          आवेश की मात्रा(Q)

विद्युत विभव एक आदिश राशि है इसका मात्रक जूल /कूलाम या volt  होता है इसके मापन के लिए निर्देश बिंदु के रूप में पृथ्वी के विभव को सुनने मान लिया जाता है पृथ्वी पर एक विशाल चालक है इसलिए इससे आवेश लेने अथवा इसे आलू मात्रा में आवेश देने पर इसके विभव में कोई विशेष अंतर नहीं होता है अर्थात पृथ्वी का विभव सदैव 0 (zero) होता है


ओम का नियम

जर्मन बौद्धिक वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने तार में प्रवाहित धारा तथा विभवांतर(V) के मध्य संबंध दर्शाने के लिए एक नियम प्रस्तुत किया इसके अनुसार यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था जैसे ताप आदि में कोई परिवर्तन ना हो तो उस में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा(I) उनके दोनों सिरों के विभांतर(V) के समानुपाती होती है इसे ही ओम का नियम कहा जाता है
       
                       V∝I
                      V=IR    R=constant
जहां R समानुपाती स्थिरांक है इसे ही धारा का प्रतिरोध कहते हैं
               
                       R=V/I
प्रतिरोध का मान 2 गुणा करने पर विद्युत धारा का मान आधा हो जाता है
प्रतिरोध (R) का मात्रक ओम (Ω)होता है



Posted --Gorang Kumar 

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